~62,700
हर साल जाति-कोटा सीटें सिर्फ JoSAA + सरकारी MBBS में
मेरिट गैप
डेटा रिपोर्ट · सितंबर 2026
भारत में कोई विभाग ये नहीं गिनता कि आरक्षण की वजह से कितने ऊँचे स्कोर वाले छात्रों का पेशा मुड़ गया, टूट गया या विदेश चला गया। जो मापा जा सकता है, वह हर साल की सीट-विस्थापन है: केंद्रीय इंजीनियरिंग और सरकारी MBBS में लगभग 62,700 जाति-कोटा सीटें — हर एक सीट एक ऊँचे रैंक वाले उम्मीदवार के लिए बंद।
ईमानदार जवाब
‘करियर बर्बाद’ एक नैतिक दावा है। ‘सीट छिनना’ एक गणित है। नीचे वही गणित है।
~62,700
हर साल जाति-कोटा सीटें सिर्फ JoSAA + सरकारी MBBS में
40.5%
केंद्रीय संस्थानों में ओपन पूल — बाकी 59.5% बँटा हुआ
37 / 360
JEE Advanced 2025 पर ST का IIT प्रवेश; जनरल का अंतिम प्रवेश ~92
−40 / 800
NEET-PG 2025 पर SC/ST/OBC क्वालीफाइंग स्कोर, खाली सीटें भरने के लिए
केंद्रीय आरक्षण (IIT, NIT, AIQ MBBS)
संविधान की मूल व्यवस्था SC/ST के लिए थी। 1990 के बाद OBC, 2019 में EWS जुड़ा। केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में आज ओपन पूल 40.5% है। आरक्षित उम्मीदवार ओपन में भी लड़ते हैं। जनरल कैटेगरी सिर्फ ओपन में लड़ती है।
| श्रेणी | हिस्सा | नोट |
|---|---|---|
| ओपन / मेरिट | 40.5% | Reserved candidates can also take these if they outscore the open cutoff. |
| EWS | 10% | From the unreserved pool; income cap ₹8 lakh. |
| OBC-NCL | 27% | Creamy layer excluded on paper. |
| SC | 15% | No creamy-layer exclusion. |
| ST | 7.5% | Largest persistent cutoff gap. |
सुप्रीम कोर्ट ने Indra Sawhney (1992) में जाति-आरक्षण 50% पर बाँधा। तमिलनाडु की 69% व्यवस्था नौवीं अनुसूची में है। पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में 80% तक है। लक्षद्वीप में ST के लिए 100%。
लक्षद्वीप
ST
100%
पूर्वोत्तर पहाड़ी राज्य
Arunachal, Meghalaya, Mizoram, Nagaland
80%
तमिलनाडु
Ninth Schedule, since 1990
69%
तेलंगाना
Education & jobs
67%
कर्नाटक
Approximate
66%
केंद्र (IIT/NIT/AIQ)
Incl. 10% EWS
59.5%
सुप्रीम कोर्ट सीमा
Indra Sawhney 1992, caste quota
50%
JEE · NEET · UPSC
यही वो जगह है जहाँ ‘प्रतिभाशाली’ शब्द आंकड़ा बनता है। एक पेपर, एक मेरिट लिस्ट — फिर श्रेणी के हिसाब से पाँच अलग दरवाज़े।
2025: जनरल 93.1 · ST 46.7 — 46 पर्सेंटाइल का फासला।
पेपर 360 अंक का। क्वालीफाइंग और वास्तविक अंतिम प्रवेश अलग हैं।
| श्रेणी | क्वालीफाई | अंतिम प्रवेश (लगभग) | नोट |
|---|---|---|---|
| जनरल (CRL) | 74/360 | 92/360 | Last male IIT admission ~92/360 |
| OBC / EWS | 66/360 | 74/360 | Qualifier 66; last OBC boy admit ~74 |
| SC | 37/360 | 46/360 | Qualifier 37; last SC boy admit ~46 |
| ST | 37/360 | 37/360 | ST girl admitted at 37/360 (10.3%) |
रैंक जितनी बड़ी, उतनी राहत। ST का अंतिम रैंक जनरल से लगभग 6 गुना पीछे।
देश की सबसे महँगी सीटों में से एक। जनरल 48, ST 1,405।
जनरल
48
OBC
207
EWS
254
SC
644
ST
1,405
CSE 2023 फाइनल स्कोर (2025 में से)
जनरल
953
EWS
923
OBC
919
SC
890
ST
891
लगभग 9,000–18,000 PG मेडिकल सीटें खाली रह गईं। सरकार ने आरक्षित श्रेणी का क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल शून्य कर दिया। −40 अंक — यानी गलत उत्तरों से कुल ऋणात्मक — अब काउंसलिंग के योग्य। मरीज़ की सर्जरी इन्हीं सीटों से निकलने वाले विशेषज्ञ करेंगे।
जनरल / EWS
50th → 7th
पुराना कटऑफ: 276
103
संशोधित / 800
SC / ST / OBC
40th → 0th
पुराना कटऑफ: 235
-40
संशोधित / 800
JoSAA 2026 · NMC 2025
नीचे का आंकड़ा ‘बर्बाद जिंदगियाँ’ नहीं है। यह उन सीटों की गिनती है जो ओपन मेरिट से नहीं भरी गईं।
IIT + NIT + IIIT + GFTI जाति-कोटा सीटें
33,325
49.5% of 67,323
सरकारी MBBS जाति-कोटा सीटें
29,411
49.5% of 59,416
एक वर्ष का योग
62,736
SC + ST + OBC सीटें, EWS नहीं
20 वर्षों का क्रम (मोटा, सीटें तब कम थीं)
10 लाख+
2008 के बाद केंद्रीय शिक्षा में 27% OBC जुड़ा। सीटें तब कम थीं, इसलिए 20×62,700 सीधा गुणा गलत होगा। फिर भी सिर्फ इन दो पाइपलाइनों में विस्थापन दस लाख के ऊपर बैठता है — राज्य कॉलेज और नौकरियाँ छोड़कर।
ज़्यादातर जनरल छात्र ‘खत्म’ नहीं होते। वे NIT की जगह प्राइवेट लेते हैं, MBBS की जगह विदेश या BDS, या साल दोहराते हैं। बर्बादी वहीं दिखती है जहाँ प्लान-B खरीदना महँगा है।
सरकारी सीट छूटे तो निजी कॉलेज ₹50 लाख से ₹1 करोड़। मध्यम वर्ग के लिए यही वो बिंदु है जहाँ पेशा नहीं, परिवार का बैलेंस-शीट मुड़ती है।
हर साल 30–40 हज़ार मेडिकल छात्र रूस, बांग्लादेश, फिलीपींस जाते हैं। कारण सिर्फ आरक्षण नहीं — सीटों की कमी भी — लेकिन सरकारी कोटा जितना सिकुड़ता है, यह रास्ता उतना चौड़ा होता है।
2024 में 13.36 लाख भारतीय छात्र विदेश में। JEE के टॉप 100 में कभी 62% प्रवास दर्ज हुआ। आरक्षण अकेला कारण नहीं। सीट-तंगी, कोचिंग और नौकरियाँ साथ चलती हैं।
NCRB 2024: 14,488 छात्र आत्महत्या। कारण कई हैं। जनरल कैटेगरी पर ओपन पूल सिकुड़ने से एक और प्रयास, एक और ड्रॉप-ईयर का दबाव बढ़ता है — इसे अलग से नहीं गिना जाता।
नीचे के कटऑफ से IIT में बैठाना सिर्फ जनरल को नहीं मारता। संसद के आंकड़े: पाँच साल में IIT और केंद्रीय विश्वविद्यालयों से 25,593 SC/ST/OBC छात्र पढ़ाई छोड़ गए। IIT कानपुर के एक अध्ययन के मुताबिक बिना आरक्षण ST का स्कोर जनरल के बराबर आने में सदियाँ लगें। मतलब: बड़े गैप पर दाखिला कई आरक्षित छात्रों को भी असफलता के लिए सेट करता है।
सभी आंकड़े सार्वजनिक कटऑफ, सीट मैट्रिक्स, संसदीय उत्तर या आधिकारिक नोटिस से।